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भाग -1 जब से कट गईल चलान

भाग -1 जब से कट गईल चलान... सईंयाँ मोरा सुतेला दलान । जब से कट गईल चलान ।। हँसी मुख चेहरा दिखे अब उदास पूछी कोई बात तब चिड़ केवल जात कर नहीं रहे कोई काम। जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान..... कुछ नहीं सुने सईंयाँ खेत पर न जाए , घर लूरू गाय भैंस सानी न खिलाए , दूधवा न धूभे सुबह शाम । जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान....... खाई के बेरिया पूछे जब जाई चादर तान सईंयाँ सुतल चारपाई मचल रहिले घर कोहराम । जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान..... फीश रहे बाकि लईकन के स्कूल में आँटा नहीं पीसल हम रही व्याकुल में सईंयाँ नहीं सुने कोई कान । जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान..... मोर सास ससुर पूछी का होईल बेटा रात दिन तू काहे चादर तान लेटा मान ल तू कर दीहले दान । जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान..... अब तू उठ जाके लाईशेन्स बनाब छोड़ चिंता तनि बउआ पेशेन्स दिखाब बन एक नागरिक महान । जब से कट गईल चलान सईंयाँ मोरा सुतेला दलान......                           ...

मामा कैसी है तैयारी जरा बतला दो

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मामा कैसी है तैयारी जरा बतला दो । कैसी दुनिया और दारी तेरी दिखला दो ।। यान कर रहा दौर बस थोड़ी देर और लैंडर का होगा ठौर कैसा स्वागत का जोर तू दिखला दो । मामा कैसी है तैयारी जरा बतला दो । कैसा किये हो प्रबंध , नाना व्यंजन सुगंध , ठंडा बोतल पानी बंद, मिले हवा मंद मंद तू दिखला दो । मामा कैसी है तैयारी जरा बतला दो ।

गुरू से टीचर

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प्राचीन काल में गुरू कहलाये ,                       अब कहलाये टीचर | अब देखिए नये रूप में ,                         सुट - बुट में टीचर | प्रणाम नहीं नतमस्तक करते ,                                              कहते गुड मॉर्निंग टीचर | आशीष नहीं आशीर्वाद देते ,                  कहते गुड मॉर्निंग टीचर | कुटिया आश्रम भूल गये ,                 अब बिल्डिंग देखे टीचर | वल्कल वस्त्र में गुरू जी दिखते ,                   अब कोट पैंट में टीचर | चलता गुरू आश्रम विच्छाटन में                        अब पेमेंट में टीचर | तरू छाया में गुरू पढ़ाते       ...

गुरू वंदना

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नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन , करूणा धारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! मैं जानूँ न धर्म , ऐसा कोई न मर्म , आलस काया ; छोड़ कैसे हटूँ मोह माया ! अब तेरी ही कृपा , नहीं नाम जपा , मैं तो हारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! नमन गुरू चरणन...... हूँ अधम नीच मंद , कुटिल हिय कर बंद , रह अज्ञानी ; गुरूवर से बड़ा कोई न दानी । दिया तूने शरण , मूर्ख हुआ मगन , मेरे प्यारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! नमन गुरू चरणन....... रसना झूठ खान , मुख भजन न ध्यान , दिया कान ! गुरू मंत्र का अभय वरदान । पाकर हो गया निहाल , कटा कली के जंजाल , लोभ सारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !..... नमन गुरू चरणन....... गुरूवर एक विनती , सदा कृपा बहती यही चाह ! दिन दुनिया से नहीं परवाह । यही दिव्य मणी ,सदा रहूँगा धनी , ये हमारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !..... नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन , करूणा धारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !         -: समाप्त :-       जय गुरू गुरूवर गुरूदेव ! जय गुरू गुरूवर गुरूदेव !!

जागा अब वनराज......

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माँद पड़ा जब शेर दहाड़ा, गीदड़ का अब मन घबराया , भेड़िया अपने घर समाया, भाग भाग सब भाग साथियों जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । जब चला गीदड़ का शासन, लिया भेड़िया मंत्री आसन, बकरी को मिला उच्चासन, हाथी कर यहाँ शिर्शासन, भेंड़ बना युवराज , जंगल में  जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । चूहों को सेना में लाया , खरहा को कप्तानी दिलाया, बन्दर कर्नल बनकर आया, तब शेर को गुस्सा आया, मारा एक दहाड़, जंगल में जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । वायु सेना में चिड़ियाँ भर्ती, जल सुरक्षा मछली करती, राज्य पुलिस में बिल्ली रहती, निगरानी में लोमड़ी चलती, कुक्कुर होम गार्ड, जंगल में तब जागा वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । भालू वन पंचायत चलाता, गैंडा मुखिया बनकर आता, गदहा यहाँ पाठ पढ़ाता, मगरों से पानी भरवाता, घोड़ा लेता टैक्स, जंगल में तब जागा वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । मधुर तान देता था मच्छर, काला कौआ गायक बनकर, तितली करती नाच यहाँ...
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पंचरत्न ! जो देखते ही देखते ही चल गये । देश को शून्य कर सूक्ष्म बन चले गये ।। रूक अब सिलसिला थम जरा यहीं पर । धर्मराज माप दंड क्या तेरा जो तुम कह ।। लील कर रहे हो नील देश हो रहा । काल या काल का समझ अब न रहा ।। हिल रहा राष्ट्र भींग भारती की अँखियाँ । लाल लली पंचत्व  जात दिन रतियाँ ।। क्या कहीं भूल है फाईल में धूल है । कुछ तो बताओ तूम जाने का कानून है ।। एक को तो मान लूँ चार और कैसे ? अरूण मनोहर सुषमा अनंत जैसे ।।                          © गोपाल पाठक                                  भदसेरी

-: पत्नी बीसा :-

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                        !! श्रीमती वामाङ्ग्यै नम: !!               !! श्रीमती शङ्कारुप्यै नमः !!                                    -: अथ पत्नी बीसा :-                            || दोहा ||                                                परम प्रिया मेरी पावनी ,भले रहे बेवकूफ ।    पर अच्छा सलाहकार है,इसमें तनिक न दुख ।।    नहीं पिता नहीं माता , नहीं बहन मेरा भाई ।    सही सीख नहीं कोई ,कितनो पढ़ा पढ़ाई ।।                        -: चौपाई :-                     ...