कविता संग्रह

Sunday, September 1, 2019

गुरू वंदना

नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन ,
करूणा धारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !

मैं जानूँ न धर्म ,
ऐसा कोई न मर्म ,
आलस काया ;
छोड़ कैसे हटूँ मोह माया !
अब तेरी ही कृपा , नहीं नाम जपा ,
मैं तो हारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !
नमन गुरू चरणन......

हूँ अधम नीच मंद ,
कुटिल हिय कर बंद ,
रह अज्ञानी ;
गुरूवर से बड़ा कोई न दानी ।
दिया तूने शरण , मूर्ख हुआ मगन ,
मेरे प्यारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !
नमन गुरू चरणन.......

रसना झूठ खान ,
मुख भजन न ध्यान ,
दिया कान !
गुरू मंत्र का अभय वरदान ।
पाकर हो गया निहाल , कटा कली के जंजाल ,
लोभ सारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !.....
नमन गुरू चरणन.......

गुरूवर एक विनती ,
सदा कृपा बहती
यही चाह !
दिन दुनिया से नहीं परवाह ।
यही दिव्य मणी ,सदा रहूँगा धनी ,
ये हमारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !.....

नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन ,
करूणा धारा !
गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !

        -: समाप्त :-
     
जय गुरू गुरूवर गुरूदेव !
जय गुरू गुरूवर गुरूदेव !!

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