निज राष्ट्र को दे सम्मान
सवा अरब की जनसंख्या में, धरा व्याकुल कर रही पुकार । दम घूँट आँसू को पीती, देख धरा माँ सुत व्यवहार । कूड़े कचड़े की गंदगी से , रोक लगाओ मेरे यार । हम हैं देश की इस मिट्टी से, भूल न जाओ माँ की प्यार । हम कैसे निर्लज बन रहते, देख दृष्य नहीं किया विचार । जागो माँ के भक्त लाडले, करें नहीं हम दुर्व्यवहार । आएँ हम सब स्वच्छ बनाएँ , धरती माँ को करें श्रृंगार । निर्मल सुन्दर स्वस्थ स्वच्छ कर, निज राष्ट्र को दें सम्मान ।