भगता काहे न आवत द्वार.....
भगता काहे न आवत द्वार गौरा जरा बताई द हमका ! काहे मचल रहे हाहाकार गौरा जरा बताई द हमका !! सावन चढ़गईल बीत रहल हे मिलत नहीं जलधार बोल बम नहीं हर हर महादेव शांत पड़ा दरवार गौरा जरा बताई द हमका भगता काहे न आवत द्वार गौरा जरा बताई द हमका ! काहे मचल रहे हाहाकार गौरा जरा बताई द हमका !! चार छे आठ दस घंटा जो करे रहे इंतजार सुनसान काहे हो जाला का भगता नाराज गौरा जरा बताई द हमका भगता काहे न आवत द्वार गौरा जरा बताई द हमका ! काहे मचल रहे हाहाकार गौरा जरा बताई द हमका !! भांग रमाये धुनी रमाये होता था जयकार बोल काँवरिया शिव के धाम सुने नहीं इसबार गौरा जरा बताई द हमका भगता काहे न आवत द्वार गौरा जरा बताई द हमका ! काहे मचल रहे हाहाकार गौरा जरा बताई द हमका !! का गंगा के पानी सुख गइल का पथ रोके पहाड़ का भगता पर कष्ट आ गइल आवत न दरवार गौरा जरा बताई द हमका भगता काहे न आवत द्वार गौरा जरा बताई द हमका ! काहे मचल रहे हाहाकार गौरा जरा बताई द हमका !! का भीर पड़ल हे भारी लगे नहीं मन ध्यान कउन समस्या आ गेल जाहिल कर रहे व्यवधान गौरा जरा बताई द हमका भगता काहे न आवत द्वार...