शिक्षकों को बदनाम यही सोशल मीडिया का काम
आये दिनों सोशल मीडिया में खास कर बिहार के शिक्षकों को खूब नीचा दिखाया जा रहा है। जितना ज्यादा नीच दिखायेंगे उनका उतना ही रीच होगा और अपने आप को गुड फील महसूस करेंगे। पापी,गुण्डा,हरामी,गन्दा, हीटलर, इश्कबाज ,चोर, राक्षस आदि-आदि अनेक निकृष्ट अलंकरणों से अलंकृत किया जा रहा है। कुछ अतत्वों के कारण पुरे शिक्षक समाज को नीचा दिखाया जा रहा है। ये चल क्या रहा है? हम सभी शिक्षक मुकदर्शक होकर मोबाइल स्क्रीन पर देख कर धृतराष्ट्र की सभा में बैठे चीरहरण को देख भीष्म पितामह की तरह रह जा रहे हैं। कुछ दिन पहले बक्सर जिले के मध्य विद्यालय की घटना से हम सभी अवगत हैं। कुछ विद्यालयों में अशिक्षकों द्वारा अशोभनीय कृत कर "शिक्षक" जैसे प्रतिष्ठित शब्द को अपशब्द का रूप बनाया जा रहा है। यह समाज के लिए सही नहीं है।कुछ असारों के कारण सार को तार तार कर देना ये सोशल मीडिया धुरंधरों की गलत फहमी है। साहब! म...