मीडिया की हाल
ये हाल देख मेरे प्यारे साथी मीडिया का क्या हाल हुआ ? दिन दिन प्रतिदिन दिन ही स्वतंत्रता का ह्रास हुआ । प्रजातंत्र में प्रेसों का ये कैसा व्यवहार हुआ । यहाँ तो तीसर नेत्र के जैसा फिर क्यों न सत्कार हुआ । हम अब कैसे रखें भरोसा मीडिया सच सब बोल रही । सूचना की ये सत्य शिरोमणि डगमग डगमग डोल रही । निजी हो या सरकारी नहीं सच्चाई खोल रही व्यापार बनाकर इस तंत्र को करवट लेकर सोय रही । - गोपाल पाठक भदसेरी