जागा अब वनराज......
माँद पड़ा जब शेर दहाड़ा, गीदड़ का अब मन घबराया , भेड़िया अपने घर समाया, भाग भाग सब भाग साथियों जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । जब चला गीदड़ का शासन, लिया भेड़िया मंत्री आसन, बकरी को मिला उच्चासन, हाथी कर यहाँ शिर्शासन, भेंड़ बना युवराज , जंगल में जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । चूहों को सेना में लाया , खरहा को कप्तानी दिलाया, बन्दर कर्नल बनकर आया, तब शेर को गुस्सा आया, मारा एक दहाड़, जंगल में जागा अब वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । वायु सेना में चिड़ियाँ भर्ती, जल सुरक्षा मछली करती, राज्य पुलिस में बिल्ली रहती, निगरानी में लोमड़ी चलती, कुक्कुर होम गार्ड, जंगल में तब जागा वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । भालू वन पंचायत चलाता, गैंडा मुखिया बनकर आता, गदहा यहाँ पाठ पढ़ाता, मगरों से पानी भरवाता, घोड़ा लेता टैक्स, जंगल में तब जागा वनराज ! छोड़ चलो अब राज यहाँ से, छोड़ चलो अब राज । मधुर तान देता था मच्छर, काला कौआ गायक बनकर, तितली करती नाच यहाँ...