ऋतुराज बसंत आगमन.....
नव उमंग नव रंग छटाएं नव यौवन में प्रकृति । ललित कलित वन बाग मनोहर हर पल दिखता हर्षित ।। ठंडी ठिठुरन कांपती धरती अब ली है अंगड़ाई । नीला अम्बर धरा पीताम्बर प्रेमी मन बहकाई ।। मंद मंद मदमस्त हवाएं गुन गुन धुप सुहानी । ऋतुराज बसंत आगमन मन हो चला मनमानी ।। नील पीत हरीत बहुरंगी सुषमा चहुँ दिश छायी । नव पल्लव ले तरू लताएं मादकता अधिकायी ।। जूही चम्पा बेली गेन्दा सरसों खेत में भाये । तिसी फूल गगन उतरे तल स्वर्ग मही बन जाए।। कलरव करते मधुर ध्वनि में पंक्षी डाली-डाली । तितली छम-छम भौंरें गूंजन बगिया क्यारी-क्यारी ।। ताल तलैया हंसते पंकज मञ्जरी आम बौराये । शुभ शुभ मंगल नित हो नूतन गुलशन गुल महकाये ।। © गोपाल पाठक