जरा बतला दो
बेटा कैसी है तैयारी जरा बतला दो । मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।। मेरी सुनो कान अपील काम करो सब मील सुरक्षा में न हो ढील रखना चहुँ दिश सलील जरा बतला दो । मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो । प्लास्टिक का न प्रयोग, पानी का न दुरूपयोग, पैसा का सदुपयोग, गरीबों को मिले भोग, जरा बतला दो । मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।। ज्यादा शोर न शराब, असामाजिक न भड़काव, इधर उधर न पेशाब, कचड़ा का रख रखाब, जरा बतला दो । मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।। जब मेला हो प्रारंभ, कोई करे न हूड़दंग, डाले रंग में न भंग, जब घूमें साथी संग, जरा बतला दो । मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।। - गोपाल पाठक भदसेरी