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गुरू वंदना

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नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन , करूणा धारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! मैं जानूँ न धर्म , ऐसा कोई न मर्म , आलस काया ; छोड़ कैसे हटूँ मोह माया ! अब तेरी ही कृपा , नहीं नाम जपा , मैं तो हारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! नमन गुरू चरणन...... हूँ अधम नीच मंद , कुटिल हिय कर बंद , रह अज्ञानी ; गुरूवर से बड़ा कोई न दानी । दिया तूने शरण , मूर्ख हुआ मगन , मेरे प्यारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा ! नमन गुरू चरणन....... रसना झूठ खान , मुख भजन न ध्यान , दिया कान ! गुरू मंत्र का अभय वरदान । पाकर हो गया निहाल , कटा कली के जंजाल , लोभ सारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !..... नमन गुरू चरणन....... गुरूवर एक विनती , सदा कृपा बहती यही चाह ! दिन दुनिया से नहीं परवाह । यही दिव्य मणी ,सदा रहूँगा धनी , ये हमारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !..... नमन गुरू चरणन, कर जोड़ी वंदन , करूणा धारा ! गुरूवर तू हीं हो मेरा सहारा !         -: समाप्त :-       जय गुरू गुरूवर गुरूदेव ! जय गुरू गुरूवर गुरूदेव !!