नारी सशक्तिकरण
हे नारियाँ !इस जगत की , सभी हो दुर्गा के अवतार | तू समाज में ऐसा कुछ कर नहीं सहो तू अत्याचार | माँ दुर्गा नहीं पर्दा में थी, करती थी दुष्टों पर वार | चंड-मुंड या शुंभ-निशुंभ हो , राह दिखायी यम के द्वार | द्रौपदी की वह परम प्रतिज्ञा , सभी कौरव पांडव से हार | दी हिम्मत और सदा हौसला , नहीं कभी वह निज मन हार || वह विरांगना लक्ष्मी बाई , युद्ध लड़ी थी अश्व सवार | विधवा होकर घर नहीं बैठी , जब खोई थी निज भर्तार | जब जब काम पड़े जब जैसा , सदा रहो तू नित तैयार , शौर्य पराक्रम दिखा शक्ति , जो जैसा जब करे व्यवहार | शांत नहीं बैठ अब अबला तू मानकर , धर तू कृपाण जब कोई अपमान है | मन में न सोंच कर तन में तू रूप धर , दुष्टों को दे दमन यही तेरी शान है ...