नव वर्ष और न्यू इयर संग जंग....
छीड़ा जंग जब नव वर्ष का न्यु इयर के संग | गोली नहीं बंदूक तोप थी बातों से ही व्यंग ||१।। न्यु इयर नव वर्ष से बोला क्या तेरे में खुबी | हम आते तो धूम मचाते तू आते तो सुनी ||२।। ये बात सुनकर नव वर्ष दे ठहाका बोला | क्या कहते हो मेरे भाई तुम मुझको तौला ?३ क्या तौलूँगा ? तुमको मैं जो खाली खाली आता | खुशी नहीं कोई हर्ष मनाता सादे आता जाता ||४।। रे न्यु इयर ! जरा सोंच समझ रख डींग नहीं मत भर | सुनकर तेरा होश उड़ेगा जा अपने पथ धर ||५।। सच कहने से क्यों तू चिड़ते ? होश उड़ेगा मेरा क्या ? आने के पहले ही मेरे हर घर खुशियाँ तुम में क्या ?६।। बम पटाखे फुटे खूब लरियाँ जगमग करते | गगन गूँज हैपी न्यु इयर से फर्स्ट जनवरी कहते ||७।। और कुछ बोलना है तो बोलो नहीं तो मेरी सुनो || मुँह नहीं अब तेरा खुलेगा थोड़ा पानी पीलो ||८।। ठंडी नहीं गर्मी अधिक प्रकृति रहे अनुकुल | सुन्दर छटा मनोहर दृश्यम बाग खिले खूब फूल || सूर्य ग्रह नक्षत्र राशियाँ शुभ दिन शुभ मुहूर्त | इसके बीना न कल्पना कैलेण्डर नहीं कर पूर्त || तू आते हो कड़क ठंड में फसलों...