उसे नहीं कभी अपनाओ.....
कुछ हाल देख कर मैं अपने को , सहन नहीं कर पा रहा | देख तिरस्कृत बलिदानों को , तब लेखनी मैं चला रहा । जिन्ना जिन्ना क्या रटते हो ? जिन्ना क्या कर दिया ? जरा इतिहास पलटकर देखो , देश विभाजन किया | है इतिहास की नहीं जानकारी , फिर क्यों उस पर बोली ? जो देश में आग लगाया , उसे मिले तो गोली | हिन्दू मुस्लिम बोल बोल कर , आग उगलता रहता था | नफरत की तलवारों से वह , अलग हमेशा करता था | देश में रह कर जिन्ना जापे , सोंच बदल जरा अपने को । जो बलिदानी खुन बहाये , याद करो जरा उनको तो | जालियाँ बाला बाग की होली , कुर्बानी को याद करो । भगत राज गुरू और शुभाष को , इतना मत अपमान करो । स्वर्ग में रहकर वे बेचारे , देख दृश्य यह रोयेंगे | जिसका नाम नहीं रहना था , कैसे वे यह देखेंगे | तो हे देश के प्यारे बासी ! देशद्रोही मत बन जाओ | जिसने देश को खंडित किया , उसे नहीं कभी अपनाओ | - गोपाल पाठक भदसेरी