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पुलिस

          हम सोते निश्चिंत घरों में,                   रात्रि पहरेदारी करती है ।           कठिन मुसीबत में तत्परता ,                   पुलिस हमेशा करती है ।             घर से दूर अलग रहकर के ,                   जन सेवा में रहती है ।          बारिश, लू और कड़क ठंड में ,                  कर्तव्य सदा ही करती है ।                       चोर डकैतों से बचने में ,                  रात्रि गस्ती करती है ।          मन चलों से रक्षा कर हमें ,                  शांति समाज में लाती है ।             ...

छठी माई की चढ़ले पख.....

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हम बिहारी छठ पुजारी करें तैयारी अब ! छठी माई की चढ़ले पख ... छठी माई की चढ़ले पख ...... हरष हरष सब गीत कढ़ाब शुद्ध विचार हिय बसाब सगे संबंधी घर ! छठी माई की चढ़ले पख .... छठी माई की चढ़ले पख ...... घाट पाट जुट सफाई व्रती के कोई कष्ट न आई अर्घ के बेर जब ! छठी माई की चढ़ले पख .... छठी माई की चढ़ले पख ...... सूप दौरा करल खरीदारी सामाग्री ला जा बजारी लाब घी गूंड़ फल ! छठी माई की चढ़ले पख ..... छठी माई की चढ़ले पख ....... नहाय खाय से हो जयतो शुरू खड़ना उपास पारण भोरू चार दिनन के व्रत ! छठी माई की चढ़ले पख ..... छठी माई की चढ़ले पख .......                         - गोपाल पाठक                               भदसेरी

हनुमान जी की आरती

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                                 आरती लाल वदन हनुमान हो लाल,           लाल वदन लाल लाल।....           राम दुलारो सीता प्यारो ,           सिंधु लांघ तू लंका जारो,           कलियुग के हैं महाराजाधिराज।           लाल वदन लाल लाल।....           आरती लाल वदन...............          अतुलित बल सकल गुण निधान,          रूद्र अवतार हैं वीर बलवान,          हिय में बसाय सियाराम हनुमान !          लाल वदन लाल लाल।....          आरती लाल वदन...............          भक्तराज हैं संत शिरोमणि,          संकटमोचन को नहीं है जनी,          सिया सियावर के चरण निहार...

हनुमान जी की विनती

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                       हे महावीर हनुमान पवन सुत,            विनय है तुमसे हमार ।            बीच भँवर में पड़ा अकेला,            कैसे पाऊँ पार ?            पवन सुत कैसे पाऊँ पार......            नहीं कोई है मेरा सहार,            किसे सुनाऊँ हाल ।            अब आगे नहीं कुछ भी दिखता,            मंद हो गया चाल ।            पवन सुत कैसे पाऊँ पार......            भार धरा पर बन के जीना,            लगता बड़ा हराम ।            राह नहीं मुझे दिख रहा है,            पथ का दे मुझे ज्ञान ।            पवन सुत ...

लंका दहन

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लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । बगिया अशोक में कियो उत्पात, रक्षक देख सहल नहीं जात, रावण को दे जानकारी बतायो बात सारी महाबल के ! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । अक्षय कुमार रथ चढ़ी आया, वीर हनुमान जी को देख घबराया, खेला दो चार साथ बाण गया सुरधाम महाबल से ! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । अब चला ईंद्रजीत बदला लेने, यहाँ देख मरे सब सेने, भिड़ें युगल रण योद्धा भरे तन क्रोद्धा महाबल हे ! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । ब्रह्म अस्त्र किया संधान, नाग फाँस में फंसे बलवान, ले कर चले मेघनाद करे हर्ष नाद महाबल पे! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । ऊँचे सिंहासन विराजे दशानन, ग्रह देव ॠषि मुनि करे शिरशासन, रावण सोंचे कई बात करें कोई घात महाबल में! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । सभा मध्य बैठे विभीषण जी अड़े, ऐसे नहीं भ्राता कोई दूत को करें, मंत्री कहे अंग भंग करे इनके संग महाबल के! लंका में आयो महाबल विकट, आज लंका में आयो है । पूँछ लपेटे वसन तेल निशिचर, खेल देख जुटे भ...

धन वर्षा भारत बाजार

        हे भारत के देश वासियों,         आ गया अब दीप त्योहार ।         इसबार त्याग करो निज मन से,         चाईनावाला तू बाजार ।         शुभ दीवाली भारत होता,         लाभ चाईना में अपार ।         तो ये कैसा त्योहार मनायें,         खुशी रहे चीनी बाजार ।               इस बार अलग मने दीवाली,         अंधियारा में चीन बाजार ।         दीप दीप्त हो रोशन जगमग,         धन वर्षा भारत बाजार                                  - गोपाल पाठक                                         भदसेरी  

हे समाज जरा जान !

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विधवा नारी विधुर पुरूष को, नहीं मिलता सम्मान । भार धरा सब माने इनको, कब लोगे संज्ञान । गंग स्वरूपा विधवा नारी ब्रह्म पुरूष महान । ये दोनों हैं इसी रूप में, हे समाज ! जरा जान । नहीं करो इनको उपेक्षित, दे नया पहचान। वंदनीय हैं पूज्य रूप में , ले आशीष खजान। शुभ कर्मों से मत कर वंचित , दे प्रथम स्थान। तुम जैसे हो वे भी वैसे , अंतर एक का ज्ञान। नहीं नहीं अंतर मत देखो , देखो एक समान । चर्म रक्त अस्थी जीय दोनों, मानवता को मान ।                            © गोपाल पाठक                                    भदसेरी