कविता संग्रह

Friday, February 4, 2022

ऋतुराज बसंत आगमन.....

 नव उमंग नव रंग छटाएं नव यौवन में प्रकृति ।

ललित कलित वन बाग मनोहर हर पल दिखता हर्षित ।।


ठंडी ठिठुरन कांपती धरती अब ली है अंगड़ाई ।

नीला अम्बर धरा पीताम्बर प्रेमी मन बहकाई ।।

मंद मंद मदमस्त हवाएं गुन गुन धुप सुहानी ।

ऋतुराज बसंत आगमन मन हो चला मनमानी ।।


नील पीत हरीत बहुरंगी सुषमा चहुँ दिश छायी ।

नव पल्लव ले तरू लताएं मादकता अधिकायी ।।


जूही चम्पा बेली गेन्दा सरसों खेत में भाये ।

तिसी फूल गगन उतरे तल स्वर्ग मही बन जाए।।


कलरव करते मधुर ध्वनि में पंक्षी डाली-डाली ।

तितली छम-छम भौंरें गूंजन बगिया क्यारी-क्यारी ।।


ताल तलैया हंसते पंकज मञ्जरी आम बौराये ।

शुभ शुभ मंगल नित हो नूतन गुलशन गुल महकाये ।।


                             © गोपाल पाठक


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