कविता संग्रह

Friday, September 27, 2019

जरा बतला दो


बेटा कैसी है तैयारी जरा बतला दो ।
मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।।

मेरी सुनो कान अपील
काम करो सब मील
सुरक्षा में न हो ढील
रखना चहुँ दिश सलील
जरा बतला दो ।
मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।

प्लास्टिक का न प्रयोग,
पानी का न दुरूपयोग,
पैसा का सदुपयोग,
गरीबों को मिले भोग,
जरा बतला दो ।
मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।।

ज्यादा शोर न शराब,
असामाजिक न भड़काव,
इधर उधर न पेशाब,
कचड़ा का रख रखाब,
जरा बतला दो ।
मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।।

जब मेला हो प्रारंभ,
कोई करे न हूड़दंग,
डाले रंग में न भंग,
जब घूमें साथी संग,
जरा बतला दो ।
मैं आ रहीं हूँ द्वारी तेरी दिखला दो ।।

                           - गोपाल पाठक
                                 भदसेरी

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