कविता संग्रह

Friday, April 19, 2019

मीडिया की हाल

ये हाल देख मेरे प्यारे साथी
मीडिया का क्या हाल हुआ ?
दिन दिन प्रतिदिन दिन ही
स्वतंत्रता का ह्रास हुआ ।

प्रजातंत्र में प्रेसों का
ये कैसा व्यवहार हुआ ।
यहाँ तो तीसर नेत्र के जैसा
फिर क्यों न सत्कार हुआ ।

हम अब कैसे रखें भरोसा
मीडिया सच सब बोल रही ।
सूचना की ये सत्य शिरोमणि
डगमग डगमग डोल रही ।

निजी हो या सरकारी
नहीं सच्चाई खोल रही
व्यापार बनाकर इस तंत्र को
करवट लेकर सोय रही ।

      - गोपाल पाठक
           भदसेरी




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