कविता संग्रह

Wednesday, November 4, 2020

नेता के वश में है जनता....

 [ तर्ज -: भगत के बस में हैं भगवान  ]

नेता के वश में है जनता 

गरीब दुखी बेरोजगार शोषित रहे

यही शोभित सुन्दरता !

नेता के वश में है जनता !!


नेता सीधी जनता की , रोज गाँव में डोले 

जनता को भोली समझे , जनता से आदर बोले

कभी वो आता नहीं था, आया चुनाव की बारी 

हाथ जोड़े चल आगे , चुनाव तक रहता जारी 

भले नहीं कोई काम नाम हो,

सब कुछ रहे पता !

नेता के वश में है जनता !!


देख नेता की माया , चुनाव जब सर पे आया 

आता अब रोजे दर पर , बात कुछ कह भरमाया 

तेरा मैं ख्याल रखूँगा ,मरते दम जनता में रहूँगा 

वोट हमहीं को देना , तेरा सब काम करूँगा 

बड़े बड़े बड़ बोल बोल के ,

जीतते लापता ! 

नेता के वश में है जनता !! 


जीत कर आता नहीं है , प्रित जनता से नहीं है 

कुर्सी से चिपके रहता , कोई परवाह नहीं है 

शान शोहरत के आगे , गाड़ी बंगला को पावे

कौन जनता को देखे , दुबारा कभी न आवे

इस तरह के नेताओं को

कैसे हम जीता ?

नेता के वश में है जनता !!

           -::- 

                  © गोपाल पाठक 

          

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