कविता संग्रह

Sunday, March 22, 2020

प्रभु नाम जपना होगा

गूंज उठा धरा आसमां ,
सागर लहरें थम गया ।
करतल घंटा ढोल मृदंग ,
शंख घोर शोर किया ।।

पर एक दिन दिन नहीं काफी,
और आगे करना होगा ।
शिवलोक ब्रह्मलोक इन्द्राशन ,
जबतक नहीं डगमग होगा ।

ॠषि मुनि गंधर्व सभी का ,
ध्यान इधर करना होगा ।
दैत्य कोरोना से बचना तो ,
कठिन साधना करना होगा ।


निज समाज निज पंथ जगत को,
महामारी से बचना होगा ।
जो जैसे हो वैसे ही ,
हरिनाम सदा रटना होगा ।

जप तप होम पूजा कीर्तन का ,
ध्यान अहर्निश करना होगा ।
नारायण सर्वेश्वर हरि का ,
नव अवतार तभी होगा  ।

तो हे देश के प्यारे वासी ,
सहज सजग रहना होगा ।
घर में व्यर्थ समय व्यतित क्यों,
प्रभु नाम जपना होगा ।

                © गोपाल पाठक
                ‎

No comments:

Post a Comment

ससुराल स्वागत

बहुत दिन के बाद जब गेली हम ससुराल। सास ससुर के गोड़ लागली पुछलन हालचाल।। साली अयलन पीछे से धरले झारी परात। पांव लागके मोजा खोललन धोयलन गोड़ ...