कविता संग्रह

Monday, September 23, 2019

भाग - 2 जब से कट गईल चलान ......

जब से कट गईल चलान ।
सईंयाँ नहीं करे फरमान ।।

पहले चलाबे सईंयाँ मोटर बाला साइकिल ,
धर पकड़ होय तो चढ़ल बाईसाकिल ,
एके बार में फट गेल गुमान।
जब से कट गईल चलान 
सईंयाँ नहीं .............

सुनूँ सुनूँ तनि सईंयाँ धीरे चलाब ,
लहरिया कट ज्यादा न दिखाब ,
बात लेहु तू मोरा मान ।
जब से कट गईल चलान 
सईंयाँ नहीं ............

लाईसेंस लागी हम सईंयाँ टेर लगईली 
सारी कागजात ठीक कभी भी न कईली 
अब केहु होईल परेशान ?
जब से कट गईल चलान 
सईंयाँ नहीं .............

यही दिन देखेलागी हल तोर बाकि ,
जतरा ठीक कर देले जब खाकी ,
पंडित जी देले ग्रह ज्ञान ।
जब से कट गईल चलान 
सईंयाँ नहीं  .............

शनि राहु केतु  सब करे घमासान ,
गुरू नीच मंगल बुध नहीं काम ,
सोम सूर्य शुक न कल्याण ।
जब से कट गईल चलान 
सईंयाँ नहीं ..............

एक खाश बात पंडित जी कहेला ,
परशासन के बात कभी न उठेला ,
सुरक्षा के रख ध्यान ।
तब से न कटतो चलान ।।

जब से कट गईल चलान ।
सईंयाँ नहीं करे फरमान ।।

                           © गोपाल पाठक 
                                 भदसेरी 

चित्र- #फेशबुक_परिवार_से

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