बिहार का ये हाल

बिहार का ये हाल है
शिक्षा बदहाल है
नेता मालामाल है
क्या कहूँ ? फिर भी नहीं मलाल है ।

परीक्षा का काल है
अभिभावक दलाल है
गार्ड पलाल है
क्या कहूँ ? प्रशासनिक सुस्त चाल है ।
चलता सालो साल है
सुधार का न जाल है
न कोई ताली ताल है
क्या कहूँ ? यही कमाल है ।

ख़्वाब कैसा ?

गौरव का थाल हो
पहचान बिहारी लाल हो
विश्व में जलाल हो
ये कैसे ? नींव ही बदहाल हो ।

      - गोपाल पाठक
           भदसेरी 

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